नज एक हल्का हस्तक्षेप है जो चुनाव की स्वतंत्रता को सीमित किए बिना, पर्यावरण के डिज़ाइन के माध्यम से लोगों को एक विशेष दिशा में व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है।
तारीफ की आड़ में व्यक्ति को नीचा दिखाने वाली बात कहकर उसके आत्मसम्मान को कमज़ोर करना और उसे अपनी स्वीकृति के लिए तरसाना एक मनोवैज्ञानिक चाल है।
किसी को उम्मीद में बनाए रखना, बिना रिश्ता साफ़ तौर पर आगे बढ़ाए या खत्म किए।
कठोर मानसिक नियंत्रण की प्रक्रिया, जिसमें पुरानी मान्यताओं को तोड़कर नई मान्यताएँ थोप दी जाती हैं।
सामने वाले को डर दिखाकर उसे अपने अधीन करना या अपनी मांगों के अनुसार चलाने के लिए दबाव डालना है। यह एक ऐसा व्यवहार है जिसमें भय का उपयोग करके दूसरे व्यक्ति को नियंत्रित किया जाता है।
दूसरों की कमज़ोरियों, अच्छी नीयत, या कमज़ोर परिस्थितियों का अनुचित फ़ायदा उठाकर अपना लाभ प्राप्त करने की क्रिया है। यह आर्थिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी हो सकता है।
यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें सामने वाले की तीव्र भावनाओं को जानबूझकर उकसाया जाता है ताकि उसका तर्कसंगत निर्णय धुंधला हो जाए, और उस भ्रम में उसे अपनी इच्छा के अनुसार नियंत्रित किया जाए। भावनात्मक अपहरण में दूसरे की भावनाओं को जानबूझकर विस्फोटित करके उसकी तार्किक सोच को बाधित किया जाता है।
यह एक ऐसा व्यवहार है जिसमें दूसरे व्यक्ति की भावनाओं का चालाकी से उपयोग करके उसे अपनी इच्छा के अनुसार सोचने या कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसमें व्यक्ति को ऐसा महसूस कराया जाता है कि वह अपनी मर्जी से चुनाव कर रहा है, जबकि वास्तव में उसे नियंत्रित किया जा रहा होता है।
दूसरों की भावनाओं, सहानुभूति और दयालुता का जानबूझकर फायदा उठाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करना भावनात्मक शोषण है। यह किसी की अच्छाई का दुरुपयोग करना है।
यह एक ऐसी रणनीति है जिसमें दूसरे व्यक्ति को धीरे-धीरे उसके परिवार, दोस्तों और अन्य सहायक लोगों से दूर कर दिया जाता है, ताकि वह केवल हेरफेर करने वाले पर ही निर्भर हो जाए। इस तरह नियंत्रण करने वाला व्यक्ति पीड़ित को सामाजिक संबंधों से काटकर अपनी पकड़ मजबूत कर लेता है।
तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर या तोड़-मरोड़कर दूसरों में अत्यधिक डर पैदा करके उनके व्यवहार या निर्णय को नियंत्रित करने की मनोवैज्ञानिक रणनीति है। यह डर की शक्तिशाली भावना का उपयोग करके लोगों को अपने अनुसार चलाने का तरीका है।
जब कोई व्यक्ति भीड़ का हिस्सा बन जाता है, तो वह अपने सामान्य स्वभाव से अलग तरीके से सोचने और व्यवहार करने लगता है।
यह एक मनोवैज्ञानिक हेरफेर तकनीक है जिसमें कोई व्यक्ति ऐसे भविष्य के वादे या योजनाएं प्रस्तुत करता है जिन्हें वह पूरा करने का इरादा नहीं रखता, ताकि दूसरे को रिश्ते में बांधे रखे या अपनी मौजूदा मांगें मनवा सके।
दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण, विश्वास और व्यवहार को बदलने के लिए उपयोग की जाने वाली मनोवैज्ञानिक रणनीतियाँ और तरीके हैं। ये तकनीकें सामान्य संवाद से लेकर हेरफेर तक फैली हो सकती हैं।
यह एक मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति है जिसमें समान मात्रा के लाभ की तुलना में हानि को लगभग 2 गुना अधिक तीव्रता से महसूस किया जाता है। खोने का डर पाने की खुशी से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है।
यह एक ऐसी मनोवैज्ञानिक रणनीति है जो जानबूझकर दूसरे व्यक्ति की भावनाओं और विचारों को चालाकी से नियंत्रित करने के लिए उपयोग की जाती है।
सामने वाले की भावनात्मक जरूरतों को पहचानकर आकर्षण और ध्यान से उन्हें अपनी ओर खींचना और अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए उपयोग की जाने वाली रणनीतियाँ हैं। ये रणनीतियाँ अक्सर बिना किसी सच्ची भावना के, सुनियोजित तरीके से अपनाई जाती हैं।
किसी बंद समूह या नेता के प्रति आंख मूंदकर समर्पण और आज्ञाकारिता की मनोवैज्ञानिक स्थिति को कल्ट मानसिकता कहते हैं।
पहले से लगाए गए समय, पैसे या मेहनत को बर्बाद न होने देने की चाहत में हम गलत और अतार्किक फैसले करते रहते हैं — यही सन्क कॉस्ट फैलेसी है।
यह एक ऐसा व्यक्तित्व प्रकार है जिसमें उच्च सहानुभूति क्षमता होती है, लेकिन उसे दूसरों की मदद के बजाय अपने फायदे के लिए हेरफेर के साधन के रूप में उपयोग किया जाता है।
यह एक ऐसी हेरफेर तकनीक है जिसमें जानबूझकर बेतुकी और असंगत बातें कहकर सामने वाले को भ्रमित किया जाता है। इस पैटर्न को पहचानना आपकी सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
यह तब होता है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर आपकी भावनाओं को भड़काता है ताकि आप तीखी प्रतिक्रिया दें, और फिर उसी प्रतिक्रिया का इस्तेमाल आपके खिलाफ करे।
किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को जानबूझकर नुकसान पहुँचाने के लिए झूठी जानकारी या तोड़ी-मरोड़ी कहानियाँ फैलाने की संगठित बदनामी की कार्रवाई है। यह एक सुनियोजित हेरफेर की रणनीति है जो किसी व्यक्ति के सामाजिक विश्वास और प्रतिष्ठा को नष्ट करने के लिए की जाती है।
यह मनोविज्ञान की वह शाखा है जो समझती है कि कुछ चरमपंथी समूह अपने सदस्यों को मानसिक रूप से कैसे नियंत्रित करते हैं।
डार्क ट्रायड (नार्सिसिज्म, मैकियावेलियनिज्म, साइकोपैथी) में रोजमर्रा के सैडिज्म को जोड़कर बनी चार अंधेरी व्यक्तित्व विशेषताएं हैं। यह अवधारणा 2013 में मनोवैज्ञानिक बकल्स और उनके सहयोगियों ने प्रस्तुत की थी।
नार्सिसिज्म, मैकियावेलियनिज्म और साइकोपैथी — इन तीन अंधेरे व्यक्तित्व विशेषताओं को एक साथ 'डार्क ट्रायड' कहा जाता है। जब ये तीनों एक साथ प्रकट होती हैं, तो पारस्परिक संबंधों में हानिकारक व्यवहार उत्पन्न हो सकता है।
अपराध स्थल के सबूतों और व्यवहार के तरीकों को देखकर अपराधी की मानसिकता और स्वभाव का अंदाज़ा लगाने की जांच तकनीक है।
यह एक ऐसी हेरफेर तकनीक है जो लोगों की मनोवैज्ञानिक कमजोरियों का फायदा उठाकर जानकारी या व्यवहार को प्रभावित करती है। यह तकनीकी हैकिंग नहीं, बल्कि मानव मनोविज्ञान पर आधारित तरीका है।
दूसरों के दर्द या तकलीफ से आनंद या संतुष्टि महसूस करने की प्रवृत्ति, जो डार्क टेट्राड का एक तत्व है।
यह एक रणनीतिक कार्य है जिसमें सामने वाले के मन पर हमला करके डर, भ्रम और मनोबल गिराने की कोशिश की जाती है और उसकी इच्छाशक्ति को तोड़ा जाता है।
सूचना को रणनीतिक रूप से विकृत, अवरुद्ध या फैलाकर सामने वाले की निर्णय क्षमता को कमज़ोर करना और अपने लिए अनुकूल परिस्थिति बनाना एक मनोवैज्ञानिक रणनीति है। सूचना को हथियार की तरह इस्तेमाल करके दूसरे की सोच और निर्णय को नियंत्रित किया जाता है।
यह वह व्यक्ति होता है जो चाहे अनजाने में ही सही, दूसरों की हानिकारक आदतों या लत को जारी रखने में मदद करता है। इसका इरादा भले ही अच्छा हो, लेकिन यह दूसरे व्यक्ति की समस्या को और गहरा कर देता है।
ऑनलाइन किसी और बनकर लोगों का भरोसा, स्नेह, ध्यान या पैसा पाने की कोशिश करना।
हूवरिंग एक ऐसी चालाकी भरी कोशिश है जिसमें कोई व्यक्ति रिश्ता खत्म करने की सोच रहे साथी को वापस खींचने के लिए तरह-तरह की चालें अपनाता है। यह नाम वैक्यूम क्लीनर ब्रांड 'हूवर' से आया है, जैसे वैक्यूम धूल खींचता है, वैसे ही यह व्यक्ति को वापस रिश्ते में खींचता है।
यह एक मनोवैज्ञानिक तंत्र है जिसमें पुरस्कार या स्नेह को अनियमित और अप्रत्याशित तरीके से दिया जाता है, जिससे सामने वाला व्यक्ति रिश्ते में और अधिक मजबूती से चिपका रहता है और निर्भर हो जाता है।
यह एक ऐसा व्यवहार है जिसमें कोई व्यक्ति दूसरे की डर, कर्तव्य-भावना और अपराध-बोध जैसी भावनाओं का फायदा उठाकर अपनी मांगें मनवाने की कोशिश करता है।
ऐसा शोषणकारी पैटर्न जिसमें डर, अलगाव, निगरानी और अपमान के ज़रिए किसी की आज़ादी छीनी जाती है।
यह एक मनोवैज्ञानिक तरीका है जिसमें भाषाई और गैर-भाषाई संकेतों के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि सामने वाला व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ।
यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अनैतिक कार्य करते हुए भी खुद को उचित ठहराता है, जिससे वह बिना अपराधबोध के हानिकारक व्यवहार कर सकता है।
लोगों के बीच संघर्ष और अविश्वास पैदा करके उन्हें एक-दूसरे से अलग करना, और फिर उस भ्रम का फायदा उठाकर अपना प्रभाव और नियंत्रण बढ़ाना एक चालाकी भरी रणनीति है।
यह एक मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार है जिसमें जानबूझकर दूसरे व्यक्ति को शर्मिंदगी महसूस कराकर उसके आत्मसम्मान को तोड़ा जाता है और उसे नियंत्रित किया जाता है। इसमें व्यक्ति की पहचान और अस्तित्व पर ही हमला किया जाता है।
यह एक मनोवैज्ञानिक हेरफेर तकनीक है जिसमें जानबूझकर दूसरे व्यक्ति में अपराध-बोध पैदा किया जाता है ताकि वह आपकी मांगों के अनुसार चले या उसके व्यवहार को नियंत्रित किया जा सके।
यह एक सुनियोजित और लक्ष्य-उन्मुख व्यवहार पैटर्न है जिसमें दूसरे की कमज़ोरियों को पहचानकर जानबूझकर उनके पास पहुँचा जाता है और उनका शोषण किया जाता है।
यह एक मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति है जिसमें व्यक्ति हमेशा खुद को पीड़ित समझता है और अपनी समस्याओं का कारण बाहरी परिस्थितियों या दूसरों को मानता है। इस मानसिक पैटर्न को पहचानना बदलाव की दिशा में पहला कदम हो सकता है।
यह एक मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति है जिसमें व्यक्ति किसी अधिकारी के निर्देशों का पालन करता है, भले ही वे नैतिक रूप से गलत हों। सत्ता वाले व्यक्ति का आदेश मिलने पर लोग अपने नैतिक निर्णय को दरकिनार कर देते हैं।
यह वह रवैया है जिसमें नुकसान उठाने वाले व्यक्ति पर ही उसके कारण और जिम्मेदारी डाल दी जाती है, जिससे पीड़ित को दोहरी चोट पहुँचती है।
किसी समूह या व्यक्ति की समस्याओं और जिम्मेदारियों को किसी विशेष व्यक्ति पर थोपकर उसे अनुचित रूप से दोष का पात्र बनाने की क्रिया है। यह व्यक्ति वास्तव में दोषी न होते हुए भी समूह के क्रोध और आलोचना का शिकार बनता है।
यह एक मनोवैज्ञानिक हेरफेर तकनीक है जिसमें दूसरे व्यक्ति को यह महसूस कराया जाता है कि चाहे वह कितनी भी कोशिश करे, वह स्थिति को नहीं बदल सकता, जिससे वह खुद ही हार मान लेता है।
यह नार्सिसिज़्म का एक प्रकार है जिसमें व्यक्ति खुद को विशेष और श्रेष्ठ मानता है और दूसरों से लगातार प्रशंसा और मान्यता की मांग करता है।
यह नार्सिसिज़्म का एक प्रकार है जिसमें व्यक्ति बाहर से आत्मविश्वासहीन और संवेदनशील दिखता है, लेकिन अंदर से विशेषाधिकार की प्रबल भावना और मान्यता की तीव्र चाहत रखता है।
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