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सामाजिक मनोविज्ञान

स्टैनफोर्ड जेल प्रयोग

Stanford Prison Experiment

यह एक प्रसिद्ध प्रयोग है जिसने दिखाया कि भूमिकाएं और परिस्थितियां इंसान के व्यवहार को कितना बदल सकती हैं। यह पर्यावरण की शक्ति के प्रति सचेत करने वाला उदाहरण है।

विस्तृत विवरण

स्टैनफोर्ड जेल प्रयोग 1971 में फिलिप ज़िम्बार्डो द्वारा किया गया एक मनोवैज्ञानिक प्रयोग था, जिसमें सामाजिक भूमिकाओं और परिवेश का मानव व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया। विश्वविद्यालय के तहखाने में एक नकली जेल बनाई गई और छात्रों को जेलर और कैदी की भूमिकाएं सौंपी गईं।

  • भूमिका का आंतरिककरण: जेलर की भूमिका निभाने वाले प्रतिभागी धीरे-धीरे सत्तावादी और क्रूर होते गए, जबकि कैदी निष्क्रिय और उदास हो गए
  • परिस्थितिजन्य शक्ति: इसने 'लूसिफर प्रभाव' को दर्शाया — कि अच्छे इंसान भी बुरे माहौल में अनैतिक व्यवहार कर सकते हैं
  • नैतिक विवाद: इस प्रयोग ने प्रतिभागियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा नैतिक विवाद खड़ा किया, और आज ऐसे प्रयोगों की अनुमति नहीं है
  • Mana की बात: हम सभी अपने परिवेश से प्रभावित होते हैं। इसीलिए एक स्वस्थ वातावरण बनाना और चुनना बहुत ज़रूरी है। एक बार सोचें — आप अभी किस माहौल में हैं?

    💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

    जब सामान्य कॉलेज छात्रों ने जेलर की भूमिका संभाली, तो वे धीरे-धीरे कठोर होते गए, और कैदी की भूमिका निभाने वाले छात्र असहाय हो गए — जिसके कारण प्रयोग केवल 6 दिनों में रोकना पड़ा।

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