प्रभाव का नियम
Law of Effect
जो व्यवहार संतोषजनक परिणाम देता है वह दोहराया जाता है, और जो व्यवहार अप्रिय परिणाम देता है वह कम होता जाता है। यह एक मूल मनोवैज्ञानिक सिद्धांत है जो बताता है कि व्यवहार के परिणाम भविष्य के व्यवहार को निर्धारित करते हैं।
Details
प्रभाव का नियम क्या है?
प्रभाव का नियम (Law of Effect) मनोवैज्ञानिक एडवर्ड थॉर्नडाइक द्वारा 1898 में प्रस्तावित एक सीखने का सिद्धांत है, जिसके अनुसार यदि किसी व्यवहार का परिणाम संतोषजनक हो तो वह व्यवहार मजबूत होता है, और यदि अप्रिय हो तो कमजोर पड़ता है।
थॉर्नडाइक का प्रयोग
थॉर्नडाइक ने एक बिल्ली को पहेली बक्से में रखकर उसका अवलोकन किया:
दैनिक जीवन में उपयोग
प्रभाव का नियम हमारे रोजमर्रा के जीवन में हर जगह काम करता है:
मनोविज्ञान में महत्व
प्रभाव का नियम बाद में स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत की नींव बना। यह व्यवहारवादी मनोविज्ञान का प्रारंभिक बिंदु था, जो पुरस्कार और दंड के व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभाव का व्यवस्थित अध्ययन करता है।
मानसिक स्वास्थ्य से संबंध
Mindy की बात
आज अगर आपने कुछ भी छोटा हासिल किया है, तो खुद को एक गर्मजोशी भरी शाबाशी दीजिए। वह खुशनुमा अनुभव ही कल एक और कदम आगे बढ़ने की शक्ति बनेगा।
💡 रोज़मर्रा का उदाहरण
जब एक बच्चा कमरा साफ करने के बाद माता-पिता से प्रशंसा पाता है और अगली बार भी खुद से सफाई करता है — यह प्रभाव के नियम का परिणाम है।
यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा निदान का विकल्प नहीं है।