आदर्शीकरण और अवमूल्यन
Idealization and Devaluation
किसी को पहले बिल्कुल परफेक्ट मानना, और फिर थोड़ी सी निराशा होने पर उसे सबसे बुरा समझने लगना — यही इस पैटर्न की पहचान है।
विस्तृत विवरण
आदर्शीकरण और अवमूल्यन एक ऐसा पैटर्न है जिसमें दूसरों के बारे में राय एकदम दो विपरीत छोरों के बीच झूलती रहती है।
शुरुआत में सामने वाले को बिल्कुल आदर्श और परफेक्ट माना जाता है, लेकिन थोड़ी सी निराशा होते ही उसे चरम रूप से नकारात्मक नजरिए से देखा जाने लगता है। यह 'स्प्लिटिंग' नामक रक्षा तंत्र से जुड़ा हुआ है।
इस पैटर्न को पहचानना ही पहला कदम है। Mana कहती हैं — अपने आप से कहें: 'यह इंसान न तो पूरी तरह परफेक्ट है, न ही सबसे बुरा। यह एक सामान्य इंसान है जिसमें खूबियाँ और कमियाँ दोनों हैं।'
💡 रोज़मर्रा का उदाहरण
जैसे किसी नए दोस्त को पहले 'सबसे अच्छा इंसान' कहना, और फिर अचानक उसे 'सबसे बुरा' महसूस करने लगना।
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यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा निदान का विकल्प नहीं है।