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Relationships & Communication

गैसलाइटिंग

Gaslighting

यह एक मनोवैज्ञानिक हेरफेर है जिसमें दूसरे व्यक्ति को अपने अनुभवों और निर्णयों पर संदेह करने पर मजबूर किया जाता है।

Details

गैसलाइटिंग क्या है?

नमस्ते, मैं Mindy हूँ। क्या कभी किसी से बात करने के बाद आपने सोचा है — "क्या मैं ही गलत हूँ...?" जो बात आपने खुद अनुभव की हो, लेकिन सामने वाला कहे "ऐसा कुछ हुआ ही नहीं", "तुम बहुत ज़्यादा सोचती हो" — तो सच में लगने लगता है कि शायद मैं ही गलत हूँ। यही है गैसलाइटिंग (Gaslighting)

गैसलाइटिंग एक ऐसी मनोवैज्ञानिक प्रताड़ना है जिसमें दूसरे व्यक्ति की वास्तविकता की समझ और निर्णय क्षमता को इस तरह नियंत्रित किया जाता है कि वह खुद पर ही संदेह करने लगे। यह शब्द 1944 की फिल्म 《Gaslight》 से आया है, जिसमें एक पति जानबूझकर अपनी पत्नी की मानसिक स्थिति को भ्रमित करता है।

गैसलाइटिंग में कही जाने वाली आम बातें

  • "मैंने ऐसा कभी नहीं कहा" — साफ़ कही गई बात से मुकर जाना
  • "तुम ज़रूरत से ज़्यादा react कर रही हो" — सही भावनाओं को अतिरंजना बताना
  • "यह सब तुम्हारे भले के लिए कर रहा हूँ" — हेरफेर को देखभाल का रूप देना
  • "कोई भी तुम्हारे साथ ऐसा नहीं करता" — अलग-थलग करना और समर्थन आधार तोड़ना
  • "लगता है तुम पागल हो गई हो" — निर्णय क्षमता पर ही हमला करना
  • गैसलाइटिंग के चरण

    गैसलाइटिंग आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ती है:

  • संदेह का चरण: शुरुआत में बस एक छोटी सी शंका — "क्या मुझे गलत याद है?"
  • बचाव का चरण: अपनी यादों और भावनाओं को बचाने की कोशिश, लेकिन बार-बार के इनकार से डगमगाहट
  • असहायता का चरण: अंततः खुद के निर्णय पर भरोसा खो देना और दूसरे पर निर्भर हो जाना
  • यह कहाँ होता है?

    गैसलाइटिंग किसी एक रिश्ते तक सीमित नहीं है:

  • प्रेमी/पति-पत्नी: यह सबसे आम रूप है
  • माता-पिता और बच्चे: "मैंने तुम्हारे लिए इतनी कुर्बानियाँ दीं और तुम्हें कदर ही नहीं"
  • कार्यस्थल: बॉस का कहना — "तुमने ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं दी थी"
  • दोस्ती: "बाकी सब दोस्त भी तुमसे नाराज़ हैं"
  • गैसलाइटिंग से बाहर निकलने के उपाय

  • अपने अनुभव लिखें: डायरी या नोट्स में तथ्य दर्ज करें — इससे आप खुद को confirm कर सकते हैं
  • किसी भरोसेमंद से बात करें: जब अकेले समझना मुश्किल हो, किसी तीसरे की नज़र बहुत मददगार होती है
  • अपनी भावनाओं पर भरोसा रखें: अगर कुछ असहज लगा, तो वह भावना पूरी तरह वैध है
  • सीमाएँ तय करें: "यह बात सच नहीं है" — यह स्पष्ट रूप से कहने का अभ्यास ज़रूरी है
  • पेशेवर मदद लें: अगर लंबे समय से गैसलाइटिंग झेल रहे हैं, तो काउंसलिंग से आत्मसम्मान वापस पाना बहुत ज़रूरी है
  • Mindy की बात

    आपने जो महसूस किया, वह गलत नहीं था। अगर कोई आपकी यादों और भावनाओं को नकारता है, तो यह आपकी कमी नहीं है। ऐसे रिश्ते से बाहर निकलने के लिए हिम्मत चाहिए — और आप उसके पूरी तरह हकदार हैं। Mindy हमेशा यहाँ आपके साथ है।

    💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

    "तुम्हें गलत याद है", "ऐसा कुछ हुआ ही नहीं", "क्या तुम बहुत ज़्यादा sensitive नहीं हो?" — इस तरह की बातें बार-बार दोहराना गैसलाइटिंग है।

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    क्या आप "गैसलाइटिंग" के बारे में और बात करना चाहते हैं?

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