गैसलाइटिंग
Gaslighting
यह एक मनोवैज्ञानिक हेरफेर है जिसमें दूसरे व्यक्ति को अपने अनुभवों और निर्णयों पर संदेह करने पर मजबूर किया जाता है।
Details
गैसलाइटिंग क्या है?
नमस्ते, मैं Mindy हूँ। क्या कभी किसी से बात करने के बाद आपने सोचा है — "क्या मैं ही गलत हूँ...?" जो बात आपने खुद अनुभव की हो, लेकिन सामने वाला कहे "ऐसा कुछ हुआ ही नहीं", "तुम बहुत ज़्यादा सोचती हो" — तो सच में लगने लगता है कि शायद मैं ही गलत हूँ। यही है गैसलाइटिंग (Gaslighting)।
गैसलाइटिंग एक ऐसी मनोवैज्ञानिक प्रताड़ना है जिसमें दूसरे व्यक्ति की वास्तविकता की समझ और निर्णय क्षमता को इस तरह नियंत्रित किया जाता है कि वह खुद पर ही संदेह करने लगे। यह शब्द 1944 की फिल्म 《Gaslight》 से आया है, जिसमें एक पति जानबूझकर अपनी पत्नी की मानसिक स्थिति को भ्रमित करता है।
गैसलाइटिंग में कही जाने वाली आम बातें
गैसलाइटिंग के चरण
गैसलाइटिंग आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ती है:
यह कहाँ होता है?
गैसलाइटिंग किसी एक रिश्ते तक सीमित नहीं है:
गैसलाइटिंग से बाहर निकलने के उपाय
Mindy की बात
आपने जो महसूस किया, वह गलत नहीं था। अगर कोई आपकी यादों और भावनाओं को नकारता है, तो यह आपकी कमी नहीं है। ऐसे रिश्ते से बाहर निकलने के लिए हिम्मत चाहिए — और आप उसके पूरी तरह हकदार हैं। Mindy हमेशा यहाँ आपके साथ है।
💡 रोज़मर्रा का उदाहरण
"तुम्हें गलत याद है", "ऐसा कुछ हुआ ही नहीं", "क्या तुम बहुत ज़्यादा sensitive नहीं हो?" — इस तरह की बातें बार-बार दोहराना गैसलाइटिंग है।
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यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा निदान का विकल्प नहीं है।