द्वैध संबंध
Dual Relationship
द्वैध संबंध तब होता है जब परामर्शदाता और सेवार्थी के बीच परामर्श संबंध के अलावा कोई अन्य संबंध (जैसे मित्रता, व्यावसायिक साझेदारी) भी एक साथ हो। परामर्श की निष्पक्षता और सेवार्थी की सुरक्षा के लिए इस स्थिति से बचना आवश्यक है।
Details
द्वैध संबंध क्या है?
द्वैध संबंध (Dual Relationship) वह स्थिति है जब परामर्शदाता, सेवार्थी के साथ चिकित्सीय संबंध के अतिरिक्त व्यक्तिगत, व्यावसायिक या शैक्षणिक जैसे किसी अन्य प्रकार का संबंध भी एक साथ रखता है। ऐसे संबंध परामर्श की निष्पक्षता को धुंधला कर सकते हैं और सेवार्थी को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए मनोविज्ञान की आचार संहिता में इन्हें कड़ाई से प्रतिबंधित किया गया है।
इसके कौन-कौन से प्रकार हैं?
यह समस्याजनक क्यों है?
परामर्श संबंध में परामर्शदाता के पास सेवार्थी की तुलना में अधिक जानकारी और प्रभाव होता है। जब द्वैध संबंध बनता है, तो यह शक्ति असंतुलन अन्य क्षेत्रों में भी फैल जाता है, जिससे सेवार्थी को नुकसान उठाना पड़ सकता है या उसके शोषण का खतरा उत्पन्न हो सकता है। साथ ही परामर्शदाता का वस्तुनिष्ठ निर्णय भी प्रभावित हो सकता है।
व्यावहारिक विचार
छोटे समुदायों में द्वैध संबंध से पूरी तरह बचना कभी-कभी कठिन हो सकता है। ऐसी स्थिति में परामर्शदाता के लिए उचित है कि वह संभावित जोखिमों के बारे में सेवार्थी से खुलकर चर्चा करे और यदि आवश्यक हो तो किसी अन्य परामर्शदाता के पास भेजे। यदि आप परामर्श संबंध में कोई असुविधा महसूस करें, तो कृपया Mindy को अवश्य बताएं।
💡 रोज़मर्रा का उदाहरण
एक सेवार्थी का मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता उसी के मोहल्ले में रहता है, जिसके कारण परामर्श सत्रों के बाहर भी व्यक्तिगत अवसरों पर उनकी अक्सर मुलाकात होती रहती है।
यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा निदान का विकल्प नहीं है।