आई-मैसेज (I-Message)
I-Message
"तुम~" की जगह "मैं~" से शुरू करके अपनी भावनाओं और जरूरतों को व्यक्त करने का संवाद तरीका है।
Details
आई-मैसेज थॉमस गॉर्डन द्वारा प्रस्तावित एक संवाद तकनीक है, जिसमें सामने वाले को दोष दिए बिना अपनी भावनाओं और जरूरतों को व्यक्त किया जाता है।
"जब (स्थिति) होती है, तो मुझे (भावना) महसूस होती है। मुझे (जरूरत) है" — इस रूप में बात की जाती है।
यह सामने वाले की रक्षात्मकता को कम करता है और ईमानदार बातचीत को बढ़ावा देता है।
घर, कार्यस्थल, शिक्षा — हर तरह के रिश्तों में इसका उपयोग किया जा सकता है।
शुरुआत में यह अजीब लग सकता है, लेकिन अभ्यास से यह संघर्ष को कम करने और रिश्तों को बेहतर बनाने में बहुत मददगार होता है। — Mindy
💡 रोज़मर्रा का उदाहरण
"तुम हमेशा देर क्यों करते हो!" (यू-मैसेज) → "जब तुम देर से आते हो, तो मुझे चिंता होती है" (आई-मैसेज) — इस तरह बात को बदलकर कहा जाता है।
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यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा निदान का विकल्प नहीं है।