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Understanding the Mind

सामाजिक पहचान सिद्धांत

Social Identity Theory

यह सिद्धांत बताता है कि लोग अपने समूह की सदस्यता के माध्यम से अपनी आत्म-पहचान बनाते हैं और अपने समूह को दूसरों से बेहतर मानने की प्रवृत्ति रखते हैं। यह समझाता है कि अपनेपन की भावना और पहचान हमारे व्यवहार को कैसे प्रभावित करती है।

Details

सामाजिक पहचान सिद्धांत क्या है?

सामाजिक पहचान सिद्धांत 1970 के दशक में सामाजिक मनोवैज्ञानिकों हेनरी ताजफेल और जॉन टर्नर द्वारा प्रस्तावित किया गया था। यह सिद्धांत बताता है कि लोग अपने समूह (अंतः-समूह) के सदस्य होने की पहचान के माध्यम से अपनी आत्म-पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं।

तीन मुख्य प्रक्रियाएं

सामाजिक पहचान तीन चरणों से गुजरकर बनती है:

  • सामाजिक वर्गीकरण (Social Categorization): लोगों को विभिन्न समूहों में बांटा जाता है (स्कूल, पेशा, राष्ट्रीयता, शौक आदि)
  • सामाजिक पहचान (Social Identification): व्यक्ति खुद को किसी विशेष समूह के सदस्य के रूप में पहचानता है
  • सामाजिक तुलना (Social Comparison): अपने समूह की दूसरे समूहों से तुलना करते हुए, व्यक्ति अपने समूह को अधिक सकारात्मक रूप से देखने की कोशिश करता है
  • अंतः-समूह पक्षपात और बाह्य-समूह भेदभाव

    सामाजिक पहचान सिद्धांत की एक प्रमुख खोज अंतः-समूह पक्षपात (In-group Favoritism) है। ताजफेल के 'न्यूनतम समूह प्रतिमान' प्रयोग में, बिना किसी अर्थ के यादृच्छिक रूप से बनाए गए समूहों में भी लोगों ने अपने समूह के सदस्यों को अधिक पसंद किया।

    यह प्रवृत्ति कभी-कभी बाह्य-समूह भेदभाव की ओर ले जा सकती है। 'हम' और 'वे' में विभाजन करने की मानसिकता पूर्वाग्रह और संघर्ष की जड़ बन सकती है।

    Mindy का गर्मजोशी भरा मार्गदर्शन

    Mindy कहती हैं: "कहीं न कहीं से जुड़े रहने की इच्छा बिल्कुल स्वाभाविक है। अपनेपन की भावना हमें स्थिरता और पहचान देती है। लेकिन यह भी सोचना जरूरी है कि 'हमारा समूह सबसे अच्छा है' की सोच कहीं दूसरे समूहों के प्रति पूर्वाग्रह में न बदल जाए। विभिन्न समूहों से जुड़े रहते हुए भी खुले मन को बनाए रखना — यही एक स्वस्थ पहचान की पहचान है।"

    रोजमर्रा की जिंदगी में सामाजिक पहचान

  • जब अपनी पसंदीदा खेल टीम जीतती है तो 'हम जीत गए!' कहकर खुश होना
  • अपने स्कूल के किसी पूर्व छात्र से मिलने पर अधिक अपनापन महसूस करना
  • अपने समूह की सफलता को अपनी सफलता की तरह महसूस करना
  • स्वस्थ अपनेपन के लिए

  • विभिन्न समूहों से जुड़कर अपनी पहचान का दायरा बढ़ाएं
  • दूसरे समूहों के नजरिए से दुनिया को देखने का अभ्यास करें
  • समूहों के बीच समानताएं खोजने से पूर्वाग्रह कम हो सकता है
  • 💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

    जब अपने स्कूल से पढ़ा कोई प्रसिद्ध व्यक्ति सामने आता है, तो उसकी उपलब्धि को अपनी उपलब्धि की तरह गर्व से महसूस करना — यह सामाजिक पहचान का एक उदाहरण है।

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