पुनः-आघात (Re-Traumatization)
Re-Traumatization
जब कोई व्यक्ति पुराने आघात जैसी किसी स्थिति का फिर से सामना करता है, या आघात की याद दिलाने वाले अनुभव से गुज़रता है, तो मूल मानसिक चोट फिर से सक्रिय हो जाती है — इसे पुनः-आघात कहते हैं।
Details
पुनः-आघात वह घटना है जब पहले का आघात अनुभव किसी समान स्थिति या उत्तेजना से फिर से जागृत हो जाता है और मूल आघात प्रतिक्रिया दोबारा सक्रिय हो जाती है।
पुनः-आघात क्या है?
Mindy आपके साथ इसे समझेगी। जब कोई व्यक्ति जो पहले आघात का अनुभव कर चुका है, किसी समान स्थिति में फिर से आता है, तो उसे ऐसा लग सकता है जैसे वह मूल आघात को दोबारा जी रहा हो — और इससे बहुत तीव्र मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया हो सकती है। यह अनजाने में भी हो सकता है, और कभी-कभी उपचार की प्रक्रिया के दौरान भी।
मुख्य विशेषताएँ
पुनः-आघात किन परिस्थितियों में होता है?
रोकथाम और सामना करने के तरीके
Mindy की ओर से एक गर्मजोशी भरी बात
जब पुराना दर्द फिर से लौट आए, तो खुद को यह कहकर दोष न दें कि "फिर वही हो रहा है।" पुनः-आघात आपकी गलती नहीं है। यह केवल एक संकेत है कि मन की चोट अभी पूरी तरह नहीं भरी है। सुरक्षित माहौल में, धीरे-धीरे, अपनी गति से ठीक होना बिल्कुल ठीक है।
💡 रोज़मर्रा का उदाहरण
जैसे कि बचपन में दुर्व्यवहार का अनुभव करने वाला कोई व्यक्ति जब कार्यालय में अपने बॉस की ऊँची आवाज़ सुनता है, तो उसके मन में पुराना डर फिर से जाग उठता है और उसका शरीर जम जाता है।
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यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा निदान का विकल्प नहीं है।