लॉरेंस कोलबर्ग
Lawrence Kohlberg
नैतिक विकास सिद्धांत के जनक, जिन्होंने बताया कि व्यक्ति की नैतिक निर्णय क्षमता चरणबद्ध तरीके से विकसित होती है। उन्होंने पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत को नैतिकता के क्षेत्र में विस्तारित किया।
Details
लॉरेंस कोलबर्ग (Lawrence Kohlberg, 1927–1987)
अमेरिकी विकासात्मक मनोवैज्ञानिक, जो नैतिक विकास सिद्धांत (Theory of Moral Development) के संस्थापक हैं। पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत से प्रेरणा लेकर उन्होंने व्यवस्थित रूप से अध्ययन किया कि नैतिक निर्णय क्षमता कैसे विकसित होती है।
नैतिक विकास के 6 चरण
कोलबर्ग ने नैतिक विकास को 3 स्तरों और 6 चरणों में विभाजित किया:
पूर्व-परंपरागत स्तर (Pre-conventional)
परंपरागत स्तर (Conventional)
उत्तर-परंपरागत स्तर (Post-conventional)
हाइन्ज़ की दुविधा
कोलबर्ग ने नैतिक दुविधा की कहानियों के माध्यम से लोगों के नैतिक निर्णय स्तर को मापा। सबसे प्रसिद्ध है 'हाइन्ज़ की दुविधा' — 'क्या पत्नी को बचाने के लिए दवा चुराना उचित है?' महत्वपूर्ण बात उत्तर नहीं, बल्कि निर्णय का कारण और आधार है।
आलोचना
कोलबर्ग के सिद्धांत पर पश्चिमी पुरुष-केंद्रित होने की आलोचना हुई। कैरल गिलिगन ने तर्क दिया कि महिलाओं का नैतिक विकास न्याय की बजाय देखभाल और संबंधों पर केंद्रित होता है।
Mindy के दृष्टिकोण से
Mindy को कोलबर्ग के शोध से एक महत्वपूर्ण बात सीखने को मिलती है। सही और गलत के बारे में हमारे निर्णय विकास के साथ और अधिक व्यापक और गहरे हो सकते हैं। अपने मूल्यों और नैतिक निर्णयों पर विचार करना भी मानसिक विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
💡 रोज़मर्रा का उदाहरण
एक छोटा बच्चा सोचता है 'डांट पड़ेगी इसलिए झूठ नहीं बोलना चाहिए', और एक वयस्क सोचता है 'ईमानदारी विश्वास की नींव है' — यह नैतिक विकास का उदाहरण है।
यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा निदान का विकल्प नहीं है।