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Mental Health Challenges

एक्सकोरिएशन डिसऑर्डर (त्वचा खुजलाने का विकार)

Excoriation Disorder

यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बार-बार त्वचा को नोचने या खुजलाने से घाव हो जाते हैं और इस व्यवहार को रोकना बहुत मुश्किल होता है। यह एक जुनूनी-बाध्यकारी संबंधित विकार है, जिसमें व्यक्ति खुद रोकना चाहता है लेकिन नियंत्रण नहीं कर पाता।

Details

परिचय

नमस्ते, मैं Mindy हूँ। आज हम एक्सकोरिएशन डिसऑर्डर (Excoriation Disorder) के बारे में बात करेंगे।

एक्सकोरिएशन डिसऑर्डर एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति बार-बार अपनी त्वचा को नोचता, खुजलाता या दबाता है, जिससे स्पष्ट घाव बन जाते हैं और इस व्यवहार पर नियंत्रण नहीं रहता। इसे स्किन पिकिंग डिसऑर्डर (Skin Picking Disorder) भी कहा जाता है और DSM-5 में इसे जुनूनी-बाध्यकारी और संबंधित विकार की श्रेणी में रखा गया है।

मुख्य अवधारणा

इस विकार की मुख्य बात यह है कि व्यक्ति रोकना चाहता है लेकिन रोक नहीं पाता। अधिकांश लोग अनजाने में त्वचा नोचना शुरू कर देते हैं और जब होश आता है तब तक घाव हो चुका होता है। यह तनाव या चिंता के समय शुरू हो सकता है, या फिर जब मन खाली हो तब अपने आप होने लगता है।

त्वचा नोचते समय क्षणिक राहत या संतुष्टि मिलती है, लेकिन बाद में घाव देखकर शर्म, अपराधबोध और निराशा महसूस होती है। घाव छुपाने के लिए लंबी आस्तीन के कपड़े पहनना या मेकअप से ढकना जैसी आदतें रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं।

इस विकार का ट्रिकोटिलोमेनिया (Trichotillomania, बाल खींचने की बीमारी) से मिलता-जुलता तंत्र होता है और यह अक्सर चिंता विकार, अवसाद और जुनूनी-बाध्यकारी विकार के साथ भी देखा जाता है।

इन स्थितियों में यह लागू होता है

  • जब त्वचा की छोटी-छोटी खुरदरी जगहों या मुंहासों को बार-बार नोचने की आदत हो
  • जब नोचना बंद करने की कोशिश करने पर भी सफलता न मिले
  • जब घावों की वजह से आधी बाजू के कपड़े पहनने से बचा जाए
  • जब तनाव के समय त्वचा नोचना और बढ़ जाए
  • जब नोचने के बाद आत्म-निंदा हो लेकिन यह बार-बार दोहराया जाए
  • इससे कैसे निपटें?

  • हैबिट रिवर्सल ट्रेनिंग (HRT) — नोचने की इच्छा होने पर मुट्ठी बांधना या हाथ में कोई और चीज़ पकड़ना जैसे वैकल्पिक व्यवहार का अभ्यास करें।
  • ट्रिगर पहचानें — किन परिस्थितियों में त्वचा नोचने की इच्छा होती है, यह लिखें ताकि पैटर्न समझ सकें और रोकथाम कर सकें।
  • शारीरिक बाधा बनाएं — बैंडेज लगाना, दस्ताने पहनना, स्टिकर लगाना आदि से स्वचालित व्यवहार को रोकें।
  • कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) — किसी विशेषज्ञ काउंसलर के साथ मिलकर व्यवहार के पैटर्न और विचारों को व्यवस्थित रूप से बदला जा सकता है।
  • आत्म-करुणा का अभ्यास करें — गलती होने पर खुद को दोष न दें। ठीक होने की प्रक्रिया में पूर्णता जरूरी नहीं है।
  • Mindy की बात

    रोकना चाहते हो लेकिन रोक नहीं पाते — यह बेबसी Mindy अच्छी तरह समझती है। यह इच्छाशक्ति की कमी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें मदद की जरूरत है। छोटे-छोटे बदलावों से शुरुआत करना भी काफी है। खुद के साथ नरमी बरतते हुए, धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहो।

    💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

    जब भी तनाव होता है, उंगलियों के आसपास की त्वचा को अनजाने में नोचने लगते हैं, खून निकलने तक रुक नहीं पाते, और बाद में घाव देखकर खुद को कोसते हैं — यह पैटर्न बार-बार दोहराया जाता है।

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    यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा निदान का विकल्प नहीं है।

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