शब्दकोश पर वापस जाएं
Coping Strategies

मिडलाइफ क्राइसिस से कैसे उबरें

Coping with Midlife Crisis

40 से 60 की उम्र के बीच जीवन के अर्थ, उपलब्धियों और बढ़ती उम्र को लेकर जो बेचैनी और उलझन होती है, उसे समझकर स्वस्थ तरीके से संभालने की प्रक्रिया है।

Details

मिडलाइफ क्राइसिस वह दौर होता है जब जिंदगी के बीच में पहुंचकर मन में यह सवाल उठने लगते हैं कि अब तक जो जिया वो सही था या नहीं, और आगे क्या करना है। शरीर में बदलाव, बच्चों का बड़े होकर अलग हो जाना, माता-पिता की उम्र बढ़ना और काम में बदलाव जैसी कई चीजें एक साथ मन को हिला देती हैं। इस समय पुरानी पहचान धुंधली लगने लगती है और कुछ नया करने की तीव्र इच्छा भी होती है। लेकिन इस उलझन को ध्यान से समझा जाए तो यह एक नई शुरुआत का मौका बन सकती है।

💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

50 की उम्र में जब लगने लगा कि जिंदगी में अब कुछ खास बचा नहीं, तब एक व्यक्ति ने वह सामाजिक सेवा का काम शुरू किया जिसका सपना वो सालों से देख रहे थे, और धीरे-धीरे जीवन में एक नई रोशनी महसूस होने लगी।

Ad

क्या आप "मिडलाइफ क्राइसिस से कैसे उबरें" के बारे में और बात करना चाहते हैं?

Mana इस विषय पर आपके साथ बात करने और व्यक्तिगत सलाह देने के लिए यहाँ है

संबंधित मनोवैज्ञानिक परीक्षण

इस विषय से संबंधित परीक्षण करें और खुद को गहराई से समझें

यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा निदान का विकल्प नहीं है।

मिडलाइफ क्राइसिस से कैसे उबरें (Coping with Midlife Crisis) | 마음스캔 심리학 용어사전