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Understanding the Mind
बहुत ज़्यादा विकल्पों का बोझ
Choice Overload
जब विकल्प बहुत ज़्यादा हों, तो फैसला लेना और उसके बाद संतुष्ट रहना दोनों मुश्किल हो सकते हैं।
Details
बहुत ज़्यादा विकल्पों का बोझ तब होता है जब अधिक विकल्प होना राहत देने के बजाय दिमाग को और थका देता है। व्यक्ति बहुत देर तक तुलना करता रह सकता है, गलत चुन लेने से डर सकता है, या चुनाव के बाद भी सोचता रह सकता है कि शायद कोई बेहतर विकल्प छूट गया। अधिक विकल्प होना हमेशा बुरा नहीं है, लेकिन दिमाग हर चीज़ को एक साथ नहीं तौल सकता। इसलिए कई बार विकल्प कम करना ही निर्णय को आसान बनाता है।
💡 रोज़मर्रा का उदाहरण
कोई व्यक्ति इतने सारे विकल्प देखता रहता है कि अंत में कुछ भी तय नहीं कर पाता और सिर्फ थकान व झुंझलाहट बचती है।
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यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा निदान का विकल्प नहीं है।