आत्मसातीकरण (पियाजे)
Assimilation (Piaget)
आत्मसातीकरण पियाजे की संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत की वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति नई जानकारी को अपने पहले से मौजूद मानसिक ढाँचे (स्कीमा) में फिट करके समझता है, बिना उस ढाँचे को बदले।
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आत्मसातीकरण (पियाजे)
आत्मसातीकरण (Assimilation) स्विस विकासात्मक मनोवैज्ञानिक जाँ पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत की एक मूल अवधारणा है। इसका अर्थ है कि जब कोई व्यक्ति किसी नई जानकारी या अनुभव का सामना करता है, तो वह उसे पहले से मौजूद संज्ञानात्मक स्कीमा (Schema) — पुराने अनुभवों से बने मानसिक ढाँचे — में समायोजित करके समझने की कोशिश करता है।
आत्मसातीकरण कैसे काम करता है?
जो बच्चा 'कुत्ता' शब्द जानता है, वह पहली बार बिल्ली देखने पर उसे भी 'कुत्ता' कह सकता है — यही आत्मसातीकरण है। नई वस्तु को पुराने ढाँचे में ढालने की यह प्रवृत्ति स्वाभाविक है।
आत्मसातीकरण बनाम समायोजन
पियाजे ने आत्मसातीकरण को समायोजन (Accommodation) से अलग किया:
इन दोनों प्रक्रियाओं का संतुलन संज्ञानात्मक विकास को संतुलन (Equilibration) की ओर ले जाता है।
दैनिक जीवन में महत्त्व
आत्मसातीकरण केवल बच्चों तक सीमित नहीं है। वयस्क भी नई जानकारी — समाचार पढ़ना, नए लोगों से मिलना, नया कौशल सीखना — को अपने पहले से ज्ञात अनुभवों से जोड़कर समझते हैं।
Mana का विचार
कभी-कभी हम नई परिस्थितियों को पुरानी सोच के ढाँचे से देखते हैं — जैसे नए रिश्ते को पुराने रिश्ते की नज़र से। इसे पहचानना ही सच्चे विकास का पहला कदम है।
💡 रोज़मर्रा का उदाहरण
एक बच्चा जिसने केवल गोल्डन रिट्रीवर देखा है, हर चार पैर वाले जानवर को 'कुत्ता' कहता है। पहली बार बिल्ली देखने पर वह उसे 'कुत्ता' ही बुलाता है — यही आत्मसातीकरण है।
यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा निदान का विकल्प नहीं है।